कार्यकर्ताओं के निर्माण से ही सशक्त राष्ट्र निर्माण संभव
कार्यकर्ताओं के निर्माण से ही सशक्त राष्ट्र निर्माण संभव
भगत सिंह फाउंडेशन के द्वारा पंडित
दीनदयाल उपाध्याय की 105 वीं जयंती के अवसर पर अंतरराष्ट्रीय तरंग संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इसके मुख्य समन्वयक
आचार्य चंद्र थे और संयोजिका प्रो.माला मिश्र
थीं।आचार्य चंद्र ने दीन दयाल जी के आदर्शों को अपनाकर सरलता, सहजता और राष्ट्र सेवा को ही अपना ध्येय बनाया है।इस संगोष्ठी का केंद्रीय
विषय था- 'संस्कृति और संचार : समकालीन सोपान।'
इस संगोष्ठी में विशिष्ट अतिथि दीनदयाल
उपाध्याय के प्रपौत्र सेवामुक्त सेशन जज चंद्रशेखर उपाध्याय ने कहा कि बप्पा का
जीवन उद्देश्य अपना निर्माण करना नहीं था वरन सशक्त राष्ट्र निर्माण के लिए कर्मठ
कार्यकर्ताओं का निर्माण करना रहा।वह स्वयं संसद में नहीं बैठे लेकिन 15 से अधिक सांसदों का उन्होंने निर्माण किया। संगोष्ठी में इंदिरागांधी
जनजातीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो .श्रीप्रकाश मणि त्रिपाठी बतौर मुख्य अतिथि
उपस्थित थे।उन्होंने दीनदयाल जी के सांस्कृतिक राष्ट्रवाद पर चर्चा की।कार्यक्रम
की अध्यक्षता अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय के कुलपति ए डी एन वाजपेयी
ने की और पंडित जी के व्यक्तित्व को सर्वसमावेशी बताया।दीनदयाल
उपाध्याय पीठ के संयोजक प्रो. अरुण कुमार, प्रो. शाहिद अली, वरिष्ठ स्वयं सेवक लक्ष्मीनारायण भाला जी, ऑस्ट्रेलिया
से साहित्यकार डॉ कौशल किशोर श्रीवास्तव, आई आई एम टी से डॉ
राकेश कुमार दुबे आदि ने भी प्रमुख विमर्शकार के रूप में अपने विचारों से
कार्यक्रम को गति प्रदान की। प्रो. माला मिश्र के विषय में अध्यक्ष प्रो. वाजपेयी ने
कहा कि माला जी कुशल संगोष्ठी शिल्पी हैं और उनके द्वारा बुने गए विषय बहुत ही
अछूते होते हैं। प्रो. माला मिश्र के कुशल संचालन में संगोष्ठी के अंत मे यह
प्रस्ताव सर्वसम्मति से प्रधानमंत्रीजी के विचारार्थ स्वीकृत हुआ कि पंडित दीनदयाल
जी के कचैरा बाज़ार वाले घर को उनका संग्रहालय बनाकर राष्ट्र की धरोहर का सम्मान
करना परम आवश्यक है।
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