केंद्रीय प्रभारी प्रो.
माला मिश्रा ने राष्ट्रभाषा अभियान के लिए आयोजित की प्रेस वार्ता
दिल्ली स्थित प्रेस
वार्ता में केंद्रीय अध्यक्ष डॉ. रवींद्र शुक्ल,
केंद्रीय प्रभारी प्रो. माला मिश्रा,
महामंत्री डॉ. रामजी दुबे, अध्यक्ष प्रो. रमा, विदेश कार्यकारिणी के महामंत्री प्रतिबिम्ब बडथ्वाल, डायमंड बुक्स प्रकाशन के अध्यक्ष एन .के.
वर्मा इत्यादि अनेक वरिष्ठ हिंदी सेवी विद्वान उपस्थित रहे। इस प्रेस वार्ता में
हिंदी की राष्ट्रीय व वैश्विक स्थिति पर चर्चा एवं आगामी योजनाओं पर विस्तार
पूर्वक चर्चा की गई। यह प्रेस वार्ता एक साथ देश-विदेश के विभिन्न स्थानों पर
आयोजित की गई। डॉ. शुक्ल ने कहा कि हिंदी की इस राष्ट्रव्यापी मुहिम में विभिन्न
विश्वविद्यालयों और विद्यालयों के हिंदी प्राध्यापकों को एकजुट होकर अग्रणी भूमिका
निभानी होगी। उन्होंने दक्षिण भारत, पूर्वोत्तर में हिंदी के
बढ़ते प्रेम का जिक्र किया और हिंदी साहित्य भारती की प्रदेश और जिला कार्यकारिणी
द्वारा किए जा रहे उल्लेखनीय कार्यों की चर्चा एवं
सराहना की। हिंदी माध्यम में शिक्षा, रोजगार, न्याय की भाषा के रूप में हिंदी तथा हिंदी में लिखे जाने वाले साहित्य और
लेखकों के केंद्र में लाना जैसे कार्य शामिल हैं। प्रो. माला
ने कार्यकारिणी के उद्देश्यों की विस्तार पूर्वक चर्चा की और कहा कि हिंदी को
राष्ट्रभाषा के संवैधानिक पद पर अधिष्ठित करवाने के लिए राष्ट्रपति जी को 25,000
से भी अधिक पत्रों का ज्ञापन सौंपा जाएगा। उन्होंने कहा कि हिंदी
भारत के जन-जन की उसके प्राणों की भाषा है, उसके साथ देश का
मान-सम्मान जुड़ा है। अतः उसकी उपेक्षा नहीं होनी चाहिए, उसका
अंगीकार सहर्ष होना चाहिए। राष्ट्रभाषा के बिना राष्ट्र गूंगा होता है। राष्ट्र को
अगर सशक्त बनाना है तो हिंदी को सफल बनाना होगा और यही
हिंदी साहित्य भारती का मूल उद्देश्य है। प्रो. रमा ने कहा कि हिंदी बोलने और
पढ़ने में हीनता बोध नहीं बल्कि गर्व का बोध होना चाहिए और हिंदी सेवियों को
पर्याप्त सम्मानित किया जाना चाहिए। इस प्रकार हिंदी साहित्य भारती के कार्यों, प्रयासों
और योजनाओं के संबंध में सार्थक चर्चा
के साथ प्रेस वार्ता सम्पन्न हुई। इस प्रेस वार्ता में
हिंदी और अंग्रेजी के अनेक प्रतिष्ठित समाचार पत्रों तथा चैनलों से पत्रकारों की
उपस्थिति रही।
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