हाथ की लकीरों में हमारा भविष्य है...
लेखिका
कमला वाजपेयी
(पुत्रवधू- आचार्य नंद दुलारे वाजपेयी)
205 अखिलालय 91 नेपियर टाउन
जबलपुर (म.प्र.)
हाथ की लकीरों में हमारा भविष्य है
जिंदगी एक पहेली के समान है
जीवन का सफर आसान नहीं है
जहन में हलचल मचाये रहती है
हाथ की लकीरों में हमारा भविष्य है
प्रभु सब की किस्मत पहले लिख देते हैं
जिंदगी एक पहेली के समान है
सब पर दया दृष्टि रखते हैं
यही हमारी किस्मत का खेल है
जिंदगी तो एक मकड़ी का जाल है
ताना बाना बुनते ही बीतती है
जिंदगी एक पहेली के समान है
किस्मत बनाये बनती है
अवगुणों से बिगड़ती जाती है
यही जीवन का सफर है
भविष्य तो इच्छा शक्ति है
जिंदगी एक पहेली के समान है
समुद्र भी घटता बढ़ता है
पूर्णिमा को लहर मारता है
कभी तुफान से संघर्ष करता है
कभी आराम से बहता है
जिंदगी एक पहेली के समान है
इसी तरह हमारी जिंदगी है
कभी खुशी कभी गम है
मैंने अपनी किस्मत को बदला है
जिंदगी की पहेली को सुलझाया है
जिंदगी एक पहेली के समान है
आत्मशक्ति से हाथो की रेखा बदली है
मेरी आत्मशक्ति ने मंजिल को पाया है
परंतु ये सफर आसान नहीं होता है
कष्ट काफी उठाना होता है
वाह जीजी,, बहुत सुंदर
जवाब देंहटाएंबहुत बढ़िया ।दीदी।
जवाब देंहटाएंवाह! सुंदर
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