कविता... मुंबई की लोकल ट्रेनें...
परिचय-
अनुपमा जीवन तिवारी
पिछले 17 वर्षों से डॉन बॉस्को हाईस्कूल माटुंगा में हिंदी की शिक्षिका के रूप में
कार्यरत हूँ। साथ ही साथ मुम्बई विश्व विद्यालय से आदिवासी विमर्श इस विषय पर
शोधकार्य भी कर रही हूँ।
भरतनाट्म नृत्य में
दो साल का प्रशिक्षण प्राप्त किया है।
विद्यालय में
प्रत्येक हाऊस की तरफ से(2019-2020)में एकांकी नाट्य प्रतियोगिता के आयोजन में
मेरे द्वारा निर्देशित एकांकी (नारी की अस्मिता)को प्रथम स्थान प्राप्त हुआ।
हिंदी के कई नृत्य
तथा नाटक के मंचों में अभिनय किया है।
मुंबई की लोकल ट्रेनें...
मुंबई की लोकल ट्रेनों में
धक्का-मुक्की
यात्रा का मज़ा
जाना है कभी?
ट्रेन के आने से पहले,
मुस्तैदी से खड़े रहना
जैसे चीनी आक्रांताओं
का मुँहतोड़ जवाब
देना हो और उसके
प्लेटफॉर्म पर आते ही,
दौड़ कर चढ़ना।
सीट के लिए पूछना,
आ..प कहाँ उतरियेगा?
और अपनी सीट के लिए,
क्लेम कर देना।
अब गिद्ध निगाह से,
उसके उतरने का इन्तजार करना।
सीट पाते ही,
घुसपैठिये की तरह,
सीट में घुस जाना।
अपनी जरूरत भर,
की सीट बनाकर,
कान में इयर फोन लगाकर
पुराने किशोर दा के
रोमेंटिक गानों का आनंद लेना।
आँखे बंद कर ,
पूरे दिन-भर की थकान
ट्रेन में उतारना।
अपना स्टेशन आने पर,
एक बार फिर उतरने
के लिए जद्दोजहद करना।
उतरने के बाद
एक योद्धा की भाँति,
स्टेशन से बाहर आना।
सच, मुंबई की
लोकल ट्रेनों
में यात्रा करना,
एक युद्ध ही जीतना है।
वैसे जिंदगी का फलसफा
भी कुछ यूँ ही है।
प्रेरणा से ओत-प्रोत इन
लोकल ट्रेनों की सवारी
का मज़ा ही कुछ और है।
Bahut Sundar Kavita hai
जवाब देंहटाएं🙏👌
Thanks beta
हटाएंअनुपमा जी मुंबई की आपाधापी का बहुत ही सजीव चित्रण किया है। सीट पर गिद्ध नजर जमाए रखना और सीट मिलने पर दिन भर की थकान ट्रेन में ही उतारना मुंबईकरों की नियति बन चुकी है। बढ़िया है।
जवाब देंहटाएं✌️🌸🌸🌺🌺🏵️🏵️
धन्यवाद पूर्णिमा जी,
हटाएंआप ही कि प्रेरणा का रंग है।
nice poem
जवाब देंहटाएंThanks dear
हटाएंVery nice truly it is an everyday battle in Mumbai local...
जवाब देंहटाएंAnu v true
जवाब देंहटाएंSuperb miss
जवाब देंहटाएंVery nice and true
जवाब देंहटाएंThanks
हटाएंYe hai Mumbai ki ground reality and hamaari life line. Itna sundar likha hai ki aankhon ke saamne wo chitra ban gaya. Ek acche lekhak ki yahi pehchaan hai ki shabdon se chitra banaaye! Well done Anupama Mousi
जवाब देंहटाएं- Pranali Tripathi (London, UK).
Thanks betu
हटाएंऐसे ही हौसला बढ़ाते रहो।
Reshma Singh
जवाब देंहटाएंVery Good
S K SINGH Hello Anupama ji just imagine anyones who have shifted from most noisy city mumbai and settled in somewhere peace and calm place but as he or she will read your poem will come in past days everything will be infront of open eyes same chillachilli Dhakkamukki on the railways platforms getting in train checking pocket purses no seat stand inbetween the seat by chance one is standing then two are sitting really it's great composition amazing talent May God bless
जवाब देंहटाएंVery nice and true 👌👍
जवाब देंहटाएंMamta Avasthi. Very good and it's true 🙂👌👍
जवाब देंहटाएंThanks bhabhi
हटाएंअनुपमाजी आपने मुंबई की लोकल का चित्रीकरण बहुत ही सटीक और सरल अन्दाज़ में किया है जो की अपने आप में सराहनीय है।
जवाब देंहटाएंआभारी आदरणीया
हटाएंआपकी सराहना हमारा हौसला बढ़ाती है
अनुपमा जी आपने वर्णन तो अद्भुत किया है लेकिन काफी डरावना है कुछ अच्छा वर्णन कीजिए लोकल ट्रेन में सफर करने का जिससे मन हो लेकिन आपका प्रयास काफी अच्छा है उसके लिए आपकी सराहना वाजिब है धन्यवाद
जवाब देंहटाएंप्रशांत पंडित अधिवक्ता मुंबई
धन्यवाद! आदरणीय
हटाएंसंघर्ष ही जीवन है,
उससे क्या घबराना।
अच्छा है, और अच्छे के लिए प्रयासरत रहो। तुम कर सकती हो।
जवाब देंहटाएंधन्यवाद!
हटाएंअच्छा है, और अच्छे के लिए प्रयासरत रहो। तुम कर सकती हो।
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