ग़ज़ल...करे फ़रियाद कब तक हम
अतहर जमाल...
एम.एड. शिक्षाशास्त्र, महात्मा गाँधी
अंतरराष्ट्रीय
हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा, महाराष्ट्र-442001
करे
फ़रियाद कब तक हम, जो बोले भी तो बोले क्या।
भुलाकर सब
गिले-शिक़वे, ये बाहें फिर से खोले क्या।।
सफ़र कटता
नहीं तन्हा, अज़ब सा हाल है दिल का।
ये दिल का
बंद दरवाजा, ज़रा होले से खोले क्या॥
अज़ब सी
बेकरारी है, तेरे बिन मेरी ऐ हमदम।
तेरी
जुल्फों के साये में, ज़रा सर रख के रोले क्या॥
बहुत
बैचेन है तुम बिन, ये आँखें कुछ नहीं कहती।
बहुत जागी
है ये आँखें कहीं, मुँह ढक के सो ले क्या।।
जिसे हसरत
हमारी है, हमें भी उसकी चाहत है।
ये राज़ -
ए - ज़ुस्तज़ु अपनी, कभी दुनिया से बोले क्या।।
Lajawab mr.jamal👌👌👌👌👏👏👏👏👏
जवाब देंहटाएंShukriya
हटाएंKeep it up ✨
जवाब देंहटाएंThanku
हटाएंबेइंतहा खुबसूरत है 👌
जवाब देंहटाएंशुक्रिया आपका
हटाएंपुरानी यादें ताज़ा हो गई भाई।।
जवाब देंहटाएंशुक्रिया भाई
हटाएंबहुत खूब....हालांकि तुमसे सुनने की बात कुछ और ही है😍....यूँ ही लिखते रहो।
जवाब देंहटाएंशुक्रिया आपका
हटाएंवाह!वाह!
जवाब देंहटाएंशुक्रिया
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जवाब देंहटाएंवाह क्या बात है!!! बहुत बढ़िया...
जवाब देंहटाएंशुक्रिया आपका
हटाएंV nice lines 👌
जवाब देंहटाएंThanku
हटाएंWow.....whose that lucky girl..
जवाब देंहटाएंWah kya kah diya dil ko lag gye
जवाब देंहटाएंबहुत शुक्रिया
हटाएंBhut badhiya athar..... par tumhari awaz mein sunna jyada acha lagta hai
जवाब देंहटाएंबहुत शुक्रिया, वो भी सुना देंगे जल्द ही ।
हटाएंबहुत खूब, अद्भुत अथर भाई।
जवाब देंहटाएंशुक्रिया आपका
हटाएंLajawab.nice line
जवाब देंहटाएंAwesome Bhai good u carry on
जवाब देंहटाएंThanku brother
हटाएंAllah aapko successful Kare ameen
जवाब देंहटाएंShukriya, Allahumma aameen
हटाएंAllah aapko successful Kare ameen
जवाब देंहटाएंबेहतरीन ग़ज़ल
जवाब देंहटाएंShukriya aapka
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