तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय वेब संगोष्ठी का विराट एवं बृहत्तम आयोजन...
तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय वेब संगोष्ठी का विराट एवं बृहत्तम आयोजन 22 जून 2020 से 24 जून 2020 तक
(दिल्ली विश्वविद्यालय की वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ. माला मिश्र के संयोजकत्व में मॉरिशस की हिंदी प्रचारिणी सभा तथा भारत के भगत सिंह
फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में)
"कोरोना के इस वैश्विक संकट के दौर में ऐसे भव्य और विराट
अंतरराष्ट्रीय बौद्धिक महायज्ञ का सफल आयोजन करने की क्षमता डॉ. माला मिश्र (दिल्ली विश्वविद्यालय) में ही है"
: केशरीनाथ त्रिपाठी, पूर्वराज्यपाल
दिल्ली
विश्वविद्यालय की वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ. माला मिश्र के संयोजकत्व में मॉरिशस की हिंदी प्रचारिणी
सभा तथा भारत के भगत सिंह फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय वेब संगोष्ठी का विराट एवं बृहत्तम आयोजन 22 जून 2020 से 24 जून 2020 तक सुबह 10 बजे से सायं 6 बजे तक किया गया। "कोविड-19 के दौर में शैक्षिक संस्थानों में ऑनलाइन शिक्षण, प्रशिक्षण एवं प्रशासन" विषयक इस अंतरराष्ट्रीय वेबसंगोष्ठी की मुख्य समन्वयक एवं संयोजिका अदिति महाविद्यालय (दिल्लीविश्वविद्यालय) की वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ.माला मिश्र द्वारा इस संगोष्ठी
का अत्यधिक कुशल व सशक्त सन्चालन किया गया। आज कोविड 19 जैसे कठिन समय में शिक्षा को ग्रहण करना अत्यधिक कठिन बन चुका है और ऐसे में जब ऑनलाइन शिक्षा पर अधिक
जोर दिया जा रहा है तथा ऑनलाइन शिक्षा का महत्व इस कठिन दौर ने समझाया है। लेकिन इसकी अपनी चुनौतियां भी हैं और उनका निदान किस तरह
से और किस रूप में प्राप्त किया जा सकता है, इसी लक्ष्य की सिद्धि इस संगोष्ठी का अभीष्ट था। इसी को लेकर अंतरराष्ट्रीय वेबसंगोष्ठी में लगातार तीन दिन बहुत ही गंभीर स्तर पर बड़े-बड़े विद्वतजनों के द्वारा विचार मंथन होता
रहा। इस बौद्धिक ज्ञानयज्ञ का इस संकट काल में इतने व्यापक रूप में आयोजन हुआ जिसमें देश और दुनिया के लगभग अधिकतम
विद्वानों का सम्भवत: प्रथमतः एक स्थान पर इतना सार्थक प्रतिनिधित्व हुआ। इस वेब संगोष्ठी में देश दुनिया से सैकड़ों प्रतिभागी शामिल रहे। इस
संगोष्ठी में लब्ध प्रतिष्ठित अनेक कुलाधिपतियों, 20 से अधिक कुलपतियों, 20 से अधिक पूर्वकुलपतियों अधिष्ठाताओं, निदेशकों, 20 से अधिक प्राचार्यों तथा आचार्यों, अकादमिक अधिकारियों, 100 से अधिक अतिविशिष्टवक्ताओं, शोधार्थियों व विद्यार्थियों की उपस्थिति रही। संभवतः यह कोरोना काल में यह अपने किस्म
की एकदम अनूठी संगोष्ठी रही। इसमें एक साथ इतने महत्वपूर्ण100 से अधिक विद्वानों की समवेत बौद्धिक आहुति ने सम्पूर्ण
देश और विश्व के बुद्धिजीवियों को विचार-मंथन हेतु एक मंच पर उपस्थित कर दिया जो कि
मील का पत्थर बन गया। देश विदेश के प्रायः हर क्षेत्र और विद्यालय, महाविद्यालय
और विश्वविद्यालय के अतिरिक्त्त शिक्षण, प्रशिक्षण और प्रशासन के हर महत्वपूर्ण
संस्थान के अनुभवों को साझा करने हेतु आकाशवाणी, दूरदर्शन विभिन्न
प्रशिक्षण संस्थानों को भी इसमें सम्मिलित किया गया जो निसंदेह अतुलनीय था।
इस
संगोष्ठी में मुख्य अतिथि के रूप में पश्चिम बंगाल के पूर्व राज्यपाल माननीय केशरीनाथ
त्रिपाठी जी उपस्थित थे। माननीय केशरीनाथ त्रिपाठी जी ने भारत की पारंपरिक शिक्षा पद्धति
को ही शिक्षा का मूल आधार बताया एवं जीवन मूल्यों
से संपृक्त शिक्षा की आवश्यकता का संदेश दिया। इतने अधिक समसामयिक विषय पर आयोजन
करने के लिए आयोजकों को बधाई दी। केसरीनाथ त्रिपाठी जी ने कहा- "इस वैश्विक संकट के दौर में ऐसा भव्य और विराट बौद्धिक महायज्ञ कराने की क्षमता
डॉ. माला मिश्र में ही है। "मॉरिशस से विश्व हिंदी सचिवालय के सचिव प्रोफेसर विनोद कुमार मिश्र इसमें विशेष
अतिथि के बतौर आमंत्रित थे। प्रोफेसर विनोद कुमार मिश्र ने भारत एवं मॉरिशस की सांस्कृतिक
परम्पराओं के सातत्य में नए विकल्पों के स्वीकार को समसामयिक परिदृश्य में मौजू बताया।
हरियाणा
सेंट्रल यूनिवर्सिटी के कुलाधिपति प्रोफेसर पी. एल चतुर्वेदी जी ने अपने विचार साझा करते हुए कहा कि ऑनलाइन शिक्षण अस्थाई
कार्यक्रम के लिए ठीक है लेकिन सतत लक्ष्य सिद्धि के लिए यह पर्याप्त नहीं होगा क्योंकि अगर ऐसी ही शिक्षा चलती रही तो
विद्यार्थी जीवन में दुर्गमता भी उत्पन्न हो सकती हैं। जो शिक्षा किसी विद्यालय या महाविद्यालय में जाकर प्राप्त की जाती है
वह शिक्षा शायद ऑनलाइन शिक्षण के द्वारा प्राप्त नहीं की जा सकती क्योंकि जब एक
विद्यार्थी स्कूल जाता है या कॉलेज जाता है तो वह वहां से बहुत कुछ सीखता है उसमें आत्मीयता और भावनात्मक संस्पर्श होता है जोकि
घर बैठे ऑनलाइन शिक्षण से संभव नहीं है। पारस्परिक
संबंध निर्माण पारंपरिक व्यवस्था में ही संभव है। महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय
विश्वविद्यालय के पूर्वकुलपति प्रोफेस रगिरीश्वर मिश्र ने कहा कि शिक्षा का अर्थ
व्यक्तिव को पूर्णता प्रदान करना है। वही शिक्षा व्यवस्था सार्थक हो सकती है जो
सर्वाधिक विकास करे। पश्चिम बंगाल विश्वविद्यालय की कुलपति सोमा बंद्योपाध्याय ने
ऑनलाइन शिक्षण एवं प्रश्न की चुनातियाँ की व्यवहारिक समीक्षा की। अटल बिहारी
वाजपेयी विश्वविद्यालय के पूर्वकुलपति मोहन लाल छीपा ने परंपरागत ज्ञान मूल्यों के
सकारात्मक स्वीकार को जरूरी बताया। पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के कुलपति
प्रोफेसर के सरीलाल वर्मा ने संस्कार धर्मी शिक्षण के गुणों का व्याख्यान करते हुए
प्रशासनिक पक्ष को भी गंभीरता पूर्वक विश्लेषित किया। माखन लाल चतुर्वेदी
पत्रकारिता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफे. संजय
द्विवेदी ने नई पीढ़ी की ज़रूरतों को समझने और उनके अनुसार ही उनका समाधान करने वाली
शिक्षा की उपादेयता पर विस्तृत और सार्थक चर्चा की। सूचना की बमबारी के स्थान पर
एकाग्रताधर्मी शिक्षण को उपादेय बताया। अटल बिहारी वाजपेयी विश्व विद्यालय के
वर्तमान कुलपति प्रोफेसर रामदेव भारद्वाज ने स्वावलंबी एवं सशक्त मनुष्य बनाने
वाली पद्धतियों को ही शिक्षा का आधार बताते हुए ग्रामीण संदर्भों की भी युक्तियुक्त समीक्षा की। प्रोफेसर जी.बी.पांडेय
ने ऑनलाइन शिक्षण के सकारात्मक पहलुओं पर सार्थक
विमर्श प्रस्तुत किया। प्रोफेसर बालास्वामी ने इस कोरोना काल में परीक्षाओं को
शिक्षण एवं प्रशासन की दृष्टि से बड़ी चुनौती बताया। भारतीय प्रशानिक अधिकारी डॉ. रश्मि सिंह ने प्रशासन की मूल चिंताओं को जताते हुए उसके समाधान के कारगर
उपायों पर सुचिंतित तरीकों से प्रकाश डाला।
सांस्कृतिक कार्यक्रम के रूप में सार्थक संदेश देने हेतु प्रसिद्ध नवोदित
अंतरराष्ट्रीय कथक नृत्यांगना शुभांगी की कोरोना मुक्ति गीत पर सुंदर, सार्थक एवं भाव प्रवण नृत्य की वीडियो द्वारा प्रस्तुति ने समस्त
श्रोतावृन्द को मंत्रमुग्ध कर दिया। प्रख्यात समीक्षक संदीप अवस्थी ने सहजता के
साथ जीवन मूल्यों के अंगीकार को ही समस्त व्यवस्थाओं का मूल बताया। हिंदी के
मूर्धन्य विद्वान साहित्यकार प्रोफेसर सूर्य प्रसाद दीक्षित ने साहित्यिक समरसता
को अपनाते हुए भारतीय गुरुकुल परंपरा के अनुसा रगुरुशिष्य पारस्परिकता विकसित करने
वाली पद्धति को ही वर्तमान संकट में अधिक प्रासंगिक बताया। कुलपति प्रोफेसर
हरिमोहन ने अपने विस्तीर्ण अनुभवों से अर्जित उपादेय जीवनधर्मी शिक्षा और प्रशासन
संबंधी चर्चा को वक्तव्य का आधार बनाया। आईआईएमसी के पूर्व निदेशक प्रोफेसर राम जी
लाल जांगिड़ ने पत्रकारिता की व्यावहारिक शिक्षा व प्रशिक्षण के लिए ऑनलाइन शिक्षण
की सीमा रेखाओं की सोदाहरण चर्चा करते हुए प्रत्यक्ष पद्धति से शिक्षण को ही
ज्यादा उपयोगी बताया

दिल्ली
विश्वविद्यालय के हंसराज महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. रमा ने मूल-भूत सरंचनागत ढांचा सही
करने की पैरवी की। जानकी देवी महाविद्यालय दिल्ली विश्वविद्यालय की प्राचार्या डॉ.
स्वातिपल ने ऑनलाइन शिक्षण, प्रशिक्षण एवं प्रशासन को कोविड 19 का सबसे सशक्त हथियार बताया। कानपुर से प्राचार्य डॉ. शालिनी मिश्र ने ग्रामीण एवं कस्बाई
स्तर पर महिलाओं की घरेलू समस्याओं पर बेबाकी पूर्वक व्याख्यान किया। प्रयागराज से
प्रोफेसर जहाँ आराने आदर्श मनुष्य बनने की
शिक्षा को ही आदर्श बताया। केंद्रीय हिंदी संस्थान के प्रोफेसर उमापति दीक्षित ने संस्कारों
के साथ-साथ सरकार के उन्नयन को परम आवश्यक बताया। मॉरिशस के प्रसिद्ध विद्वान राजहीरामणि
ने पूर्णता प्रदान करने वाली शिक्षा की अनिवार्यता को आधार बताया। महात्मा गांधी संस्थान, मॉरिशस की प्रोफेसर अलका धनपत ने मॉरिशस के दृष्टांतों के परिप्रेक्ष्य में शिक्षा, प्रशिक्षण एवं प्रशासन की समस्याओं एवं समाधान को बखूबी विवेचित किया। दक्षिण अफ्रीका
से डॉलोकेश महाराज ने अपने देश के ग्रामीण संदर्भ को उभारते हुए अपने वक्तव्य को पल्लवित
किया। दक्षिण अफ्रीका से ही डॉ. हीरालाल सेवनाथ ने हिंदी शिक्षण की व्यवहारिक चुनौतियों
की समसामयिक चर्चा की। मेलबर्न से डॉ. कौशल किशोर श्रीवास्तव ने पश्चिमी देशों, भारत तथा विशेष रूप से ऑस्ट्रेलिया के शैक्षिक संस्थानों की तुलनात्मक स्थिति पर
गंभीरता पूर्वक क्रमबद्ध तरीके से विचार रखे। विद्यालयी चिंताओं पर स्तर-भेद के मूल
आधारों पर बहुत सार्थक एवं गहन चर्चा करते हुए प्राचार्यों डॉ. सुनील त्रिवेदी, एच. आर शर्मा, निधि चौधरी, मीनू शर्मा इत्यादि ने भी अपने उपयोगी तथा व्यवहारिक वक्तव्यों से प्रतिभागियों
को लाभान्वित किया। आकाशवाणी से डॉ. अमरनाथ अमत और दूरदर्शन से डॉ. राजीव कुमार शुक्ल ने पत्रकारिता प्रशिक्षण की समस्याओं एवं उनके संभावित निदानों
पर सटीकता से प्रकाश डाला। अमरीका से डॉ. सीमा बजावेद ने भारत एवं अमरीका के मूल-भूत ढांचे की भिन्नता
को उकेर कर अपने अनुभव साझा किए। दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा के अध्यक्ष सुंदरम पार्थसार
थीनेइस विराट संकल्पना एवं सफल सलाह के लिए संयोजिका एवं मुख्य समन्वयक डॉ. माला मिश्र की हिम्मत का लोहा मानते हुए उन्हें आशीर्वचनों
से संबोधित किया। दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के वरिष्ठ प्रोफेसर के.एन तिवारी
ने काव्यात्मक रूपमें परिस्थितियों को बयां किया। झारखंड के प्रोफेसर जे.बी.पांडेय के कोरोना
संबंधी व्याख्यान को गीतात्मक संस्पर्श के द्वारा अभिव्यक्त करने का प्रयास भी बहुत
अधिक प्रभावी रहा। भारत पेट्रोलिय ममंत्रालय के मीडिया प्रभाग में डीन वरिष्ठ प्रोफेसर
के, जी. सुरेश ने विषय को सूत्रात्मक रूप में बहुत ही व्यवहारिक एवं सुंदर रूप में उपयोगी
बिंदुओं से समन्वित कर संप्रेषित किया।
कुल
6 सत्रों में लगभग 20 घंटे तक चली इस विराट संगोष्ठी का रूपरेखाबद्ध सुचारू
आयोजन हुआ। प्रत्येक सत्र के अंत में प्रश्न सत्र का संचालन किया गया जिसमें कुछ प्रश्नों
को आमंत्रित किया गया। हर सत्र के अंत में चयनित प्रपत्रों का प्रतिभागियों द्वारा
सारांश वाचन किया गया।अंत मेमॉरिशस, दक्षिण अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया, नेपाल, बांग्लादेश, सिंगापुर, इंग्लैंड, अमरीका, भूटान आदि देशों सहित भारत वर्ष के उत्कृष्ट विद्वानों ने इस संगोष्ठी को सार्थक
बनाया। इस संगोष्ठी में एक अन्य इतिहास बनाते हुए यू.जी.सी. इम्पैक्टफैक्टर युक्त संतसाहित्य की
परंपरा विषयक पुस्तक का प्राचार्या रहंसा शुक्ल ने संयोजिका डॉ.माला मिश्र के
द्वारा अंतरराष्ट्रीय लोकार्पण करवाया। राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त पूर्व प्राचार्य
डॉ. सुनील त्रिवेदी ने प्राथमिक, माध्यमिक, उच्च शिक्षा एवं प्रशिक्षण के साथ-साथ प्रशासनिक चुनौतियों
एवं संभावनाओं की सार्थक एवं सोदाहरण विवेचना की।
अन्य
अनेक अतिथियों व विद्वानों ने भी बताया कि इस समय के लिए ऑनलाइन शिक्षा अधिक
महत्वपूर्ण हैं क्योंकि कोविड-19 ऐसे महामारी से बचते हुए शिक्षा प्राप्त करने का
यह एकमात्र साधन है। जिससे विद्यार्थी अपने ज्ञान को सुचारू रूप से अर्जित कर सकते
हैं, और आने वाले भविष्य के लिए तैयार हो
सकते हैं। ताकि उनका आने वाला भविष्य इस महामारी से प्रभावित न हो।
समापन सत्र के अंत में हिंदी प्रचारिणी सभा, मॉरिशस के उपाध्यक्ष श्री यन्तुदेव बुधु
ने भारत और मॉरिशस की सांस्कृतिक विरासत एवं साहित्यिक थाती का विस्तृत उल्लेख करते
हुए सभी का औपचारिक धन्यवाद ज्ञापन किया, महत्वपूर्ण बिंदुओं की चर्चा करते हुए हिंदी के विस्तार की संभावनाओं को प्रकट
किया और समाधान के कारगर उपायों पर विमर्श किया तथा इस भव्य एवं सुंदर तीन दिवसीय आयोजन
की सफलता के लिए संयोजिका डॉ. माला मिश्र के प्रति उद्गार प्रकट किए कि इतने बृहत्तम
फलक पर एकांतिक रूप से प्रयास कर के सारे विश्व को इस सारस्वत अनुष्ठान के लिए एक मंच
पर एकत्रित करने का चुनौतीपूर्ण कार्य केवल डॉ. माला मिश्र ही कर सकती थीं।
इस
संगोष्ठी में प्रो. संजीव भानावत, डॉ. रामशरण गौड़, वरिष्ठ पत्रकार शम्भूनाथ शुक्ल, वीरेंद्र कुमार यादव, वरिष्ठ चिंतक लक्ष्मीनारायण भाला, सत्यवती कॉलेज के प्राचार्य डॉ. विजयशंकर मिश्र,अम्बेडकर विश्वविद्यालय के प्रो. सत्यकेतु
सांकृत, प्रो. अनिल अंकित राय, डॉ. विक्रम सिंह, श्री भगवान चौधरी, श्री देवेंद्र सचदेवा, दौलत राम कॉलेज दिल्ली विश्वविद्यालय की प्राचार्या डॉ.
सविता राय, डॉ. ए.के.भागी, डॉ. मधु कौशिक, प्रो. दिवाकर शर्मा, डॉ. कुमार रत्नम, प्रो. शैलेन्द्र कुमार शर्मा प्रोगीता नायक, डॉ. ममता दुबे, डॉ.एसएस अवस्थी, डॉ.रविटेक चंदानी, डॉ.एच.आर.शर्मा, डॉ. महेश कुमार शर्मा, डॉ. रामबक्ष, डॉ. निधि चौधरी, डॉ. एलसी निगम, डॉ. मीनू तिवारी, डॉ. नीलम ऋषिकल्प, बिशम्भर नेवर, डॉ. लक्ष्मी, डॉ. मनोजदयाल, डॉ. अम्बरीश सक्सेना, डॉ. अमिता पांडेय, प्रो. बी. के. तिवारी, डॉ. अर्जुन चव्हाण, वरिष्ठ पत्रकार अरशद फरीदी, डॉ. गिरिराजशरण अग्रवाल, प्रो. चितरंजनकार, डॉ. महेन्द्रपाल शर्मा, डॉ. अमरनाथ अमर, डॉ. राजीव कुमार शुक्ल, डॉ. जसिपाल राणा, डॉ. आलोक पुराणिक, पार्थ सारथी थपलियाल, डॉ. सीमा बजावेद, डॉ. मनोज कुमार (वर्धा), डॉ. अधीश काधके, प्राचार्य प्रतुषवत्सला, डॉ. सुधाकर पाठक, सी.जे.एम.सी.से डॉ. राकेश कुमार, विपुलपंवार (विदेशमंत्रालय), डॉ. प्रकाश चुरदेकर, राजीव श्रीवास्तव, सुधीर सोनी, डॉ. प्रमोद कुमार डॉ. शालिनी मिश्रा, डॉ. मोहन बैरागी, डॉ. ऋषि कुमार मिश्रा, प्रो. अरुण कुमार भगत, डॉ. आलोक कुमार पांडेय, डॉ. अनुपम कुमार भाटिया, प्रखर श्रीवास्तव, भागयेन्द्र पटेल, बबिता यादव (उपप्राचार्या), रवींद्र माहेश्वरी, डॉ. ज्ञानतोष झा, डॉ. हरनेक सिंह गिल, डॉ. पृथ्वीराज थापर आदि ने भी बौद्धिक योगदान दिया।
औपचारिक
रूप से समापन की घोषणा करने से पूर्व मुख्य समंवयक और संयोजिका डॉ. माला मिश्र ने समस्त आयोजन समिति, भगत सिंह फाउंडेशन एवं हिंदी प्रचारिणी सभा, मॉरिशस के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित की एवं
अपने विचार साझा किए। इस विराट एवं
भव्यतम अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी की बीज परिकल्पना का उद्देश्य समूचे विश्व की
साझी संकटशीलता को बताते हुए सभी की चिंताओं को एक मंच पर उठाने और निदान तक पहुंचने
की योजना को साझा किया। ऑनलाइन प्लेटफार्म को वर्तमान शिक्षण, प्रशिक्षण एवं प्रशासन की दृष्टि से आवश्यक विकल्प बताते हुए उन्होंने मशीनी बनने
के स्थान पर आत्मबोध से सुसंस्कृत परिपूर्ण एवं आत्मविश्वास से संवलित स्वावलंबी संस्कार
पूर्ण आदर्श मनुष्य का निर्माण कर सर्वांगीण विकास धर्मी बनाने वाले शिक्षण, प्रशिक्षण व हितकारी प्रशासन को ही श्रेयस्कर निदान के रूप में मूल्यवान बताया
और वसुधैव कुटुम्बकम के आदर्श की स्थापना के मूल-भूत आदर्श के ध्येय सिद्धि को शिक्षा
का मूल-मंत्र स्वीकार करने का संदेश देते हुए, सर्वेभवन्तुसुखिनः, सर्वेसंतुनिरामया: की स्वस्ति कामना कर कोविड-19 से मुक्ति दिलाने में पुनःपुनःविश्व
गुरु भारत की निर्विशिष्ट भूमिका के प्रति सुदृढ़ विश्वास जताया। और इस प्रकार इस त्रिदिवसीय
अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी रूपी आत्ममंथनकारी ज्ञान यज्ञ का सफल बौद्धिक आयोजन सम्पन्न
हुआ।
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